(मधुमेह) और डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल / लिपिड संबंधी समस्याएं) क्या हैं?
अनेक मधुमेह के रोगियों में कोलेस्ट्रॉल और लिपिड का स्तर असामान्य होता है – इस स्थिति को मधुमेह डिस्लिपिडेमिया कहा जाता है
यह हृदय रोग, स्ट्रोक और एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना) के जोखिम को बढ़ाता है।
मधुमेह डिस्लिपिडेमिया में क्या होता है:
- ↑ ट्राइग्लिसराइड्स (उच्च स्तर)
- ↓ HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) (कम स्तर)
- ↑ LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) (छोटे, सघन कण जो धमनियों को नुकसान पहुँचाते हैं)
यह संयोजन हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए बहुत खतरनाक होता है।
कारण
इंसुलिन रेजिस्टेंस (इंसुलिन प्रतिरोध), जो टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) में आम है।
- मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली
- खराब खान-पान (जंक फूड, तला-भुना/तेलीय भोजन, अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट)।
- आनुवंशिक प्रवृत्ति
लक्षण
अक्सर जटिलताएं विकसित होने तक इसके कोई लक्षण नहीं दिखते। लेकिन कभी-कभी:
- सीने में दर्द या कसाव
- थकान और कमजोरी
- चलते समय पैरों में ऐंठन (पेरिफेरल आर्टरी डिजीज - धमनियों की बीमारी)
- अचानक स्ट्रोक या दिल का दौरा (गंभीर मामलों में)।
जटिलताएँ
- एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में रुकावट / ब्लॉकेज)।
- कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय रोग)
- स्ट्रोक
- रक्त संचार की कमी (खराब सर्कुलेशन) के कारण मधुमेह फुट (पैर की समस्या)।
होम्योपैथिक दृष्टिकोण
होम्योपैथी केवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ही नहीं, बल्कि पूरे रोगी (संपूर्ण स्वास्थ्य) को ध्यान में रखती है। दवाइयों का चयन शरीर की बनावट , मानसिक स्थिति और शारीरिक शिकायतों के आधार पर किया जाता है
- फॉस्फोरस– खराब रक्त संचार (कमजोर सर्कुलेशन), नसों की शिकायतों और छाती में जकड़न के लिए।
- कैलकेरिया कार्बोनिका – उन मोटे रोगियों के लिए जिन्हें अंडे और दूध की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) होती है और जिन्हें बहुत आसानी से या जल्दी पसीना आ जाता है।
- ग्रेफाइट्स – अधिक वजन वाले (ओवरवेट) रोगियों के लिए जिन्हें त्वचा पर दाने/मुंहासे और कब्ज की समस्या रहती है।
- बैरिटा म्यूरिएटिकम – आर्टेरियोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना), उच्च ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल के लिए।
- क्रैटेगस ऑक्सीकैंथा (मदर टिंचर) – हृदय की कमजोरी और कोलेस्ट्रॉल से संबंधित हृदय पर पड़ने वाले दबाव में सहायक।
होम्योपैथी के साथ-साथ, खान-पान पर नियंत्रण (कम तेल, कम चीनी), नियमित टहलना, योग और वजन प्रबंधन अनिवार्य हैं।



