प्रीडायबिटीज क्या है
प्रीडायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें आपके रक्त शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन मधुमेह के रूप में निदान किए जाने के लिए पर्याप्त रूप से उच्च नहीं होता।
यह टाइप 2 मधुमेह से पहले एक चेतावनी चरण के रूप में कार्य करता है।
- प्रीडायबिटीज वाले कई लोगों में लक्षण नहीं होते, लेकिन यदि कोई कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में उन्हें मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक होने का उच्च जोखिम होता है।
प्रिडायबिटीज के कारण
- इंसुलिन प्रतिरोध – शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं, इसलिए रक्त में शुगर बनी रहती है।
2. मोटापा (विशेषकर पेट की चर्बी)।
3. अस्वस्थ जीवनशैली – व्यायाम की कमी, जंक फूड, अनियमित खाने की आदतें।
4. पारिवारिक इतिहास – यदि माता-पिता या भाई-बहनों को मधुमेह है।
5. उम्र – 40 वर्ष के बाद जोखिम बढ़ जाता है।
6. अन्य स्थितियाँ – उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)।
प्रिडायबिटीज के लक्षण
अधिकांश लोगों को कोई लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए इसे अक्सर "मौन स्थिति" कहा जाता है।
- लेकिन कुछ लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
- आम से ज़्यादा थका हुआ महसूस हो रहा है।
- बढ़ी हुई प्यास या बार-बार पेशाब आना।
- घाव का धीमा भरना
- धुंधली दृष्टि
- त्वचा पर गहरे धब्बे (विशेषकर गर्दन, बगलें, कोहनियाँ) – जिसे एकान्थोसिस निग्रिकन्स कहा जाता है।
प्रगति का जोखिम
- हर साल, प्रीडायबिटीज वाले 5–10% लोग टाइप 2 मधुमेह में विकसित हो जाते हैं।
- यदि जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो 5–10 वर्षों के भीतर अधिकांश प्रीडायबिटिक लोग मधुमेही बन सकते हैं।
रोकथाम और प्रबंधन
- वजन प्रबंधन – 5–7% वजन कम करने से भी जोखिम कम होता है।
- नियमित व्यायाम – प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चलना।
- संतुलित आहार – अधिक सब्जियाँ, साबुत अनाज, कम चीनी और तले हुए खाद्य पदार्थ।
- तनाव प्रबंधन और पर्याप्त नींद।
- नियमित जांच (रक्त शर्करा की जाँच)
प्रीडायबिटीज में होम्योपैथिक दृष्टिकोण
होम्योपैथी निम्नलिखित पर केंद्रित है:
- प्रारंभिक हस्तक्षेप – प्रीडायबिटीज से डायबिटीज की ओर बढ़ने को रोकना।
2. मेटाबोलिज्म को सुधारना – उपचार शुगर के उपयोग में सुधार करते हैं और इंसुलिन प्रतिरोध को कम करते हैं।
3. व्यक्तिगत उपचार – रोगी के संपूर्ण इतिहास (शारीरिक + मानसिक + पारिवारिक पृष्ठभूमि) के आधार पर नुस्खा।
आम तौर पर उपयोग की जाने वाली दवाएँ (शारीरिक बनावट के अनुसार):
- सीजीजियम जाम्बोलनुम – बढ़ी हुई शुगर की प्रवृत्ति को कम करने में मदद करता है।
- फॉस्फोरिक एसिड – थकान, कमजोरी, परिवार में मधुमेह का इतिहास।
- लाइकोपोडियम – पाचन संबंधी समस्याओं, पेट फूलना और लालसाओं के साथ शुगर असंतुलन के लिए।
- सल्फर – निष्क्रिय जीवनशैली, गर्माहट का अनुभव, त्वचा की समस्याएँ और शर्करा असंतुलन।
नोट:
दवाएं हमेशा एक योग्य होम्योपैथ की देखरेख में ही लेनी चाहिए।



